समंदर से भी यार (ग़ज़ल) मुकम्मल
समंदर से भी यार-यारी रखा करो, या पार जाने की तैयारी रखा करो। घर जाओ तुम तो आईना ज़रूर देखना, अपनी भी थोड़ी ज़िम्मेदारी रखा करो। संभलकर उड़ो आसमानों की ऊँचाई पर, शाहीन से भी अपनी पहरेदारी रखा करो। पेड़ लगाए हैं तो पत्थरबाज़ों से होशियार, कच्चे फलों पे भी निगरानी रखा करो। हमें ये पता चला कि वो बेवफ़ा है, आईने, तुम न यूँ जी-भारी रखा करो। घर के अंदर दग़ाबाज़ भी दुश्मन से कम नहीं, चिराग़ों पे अपनी रोशनी सारी रखा करो।