Sher | शायरी जो दिल छू ले | Shayari Jo Dil Chhoo Le
हमने चरागों को तालीम कुछ ऐसी दे रखी थी के घर जल गए दुश्मन के इल्ज़ाम भी हवाओं पे गया देख कर साज़िश मेरे जिस्म और मिज़ाज की होठ चुपचाप सहते रहे आंखों को गवारा ना हुआ रौनक ना देखिए मेरी सूरत की ए जनाब मेरे ग़म को छुपाने का राज़़ है ये मैं अपने चेहरे पर खुशी की झलक रखता हूं अंदर से टूटा हूं मगर दुश्मन को परेशां रखता हूं मत पूछ तू मेरी दास्तां-ए-ग़़म मुझसे मैं बेवजह किसी के आंसू गिराना नहीं चाहता मैंने फिराई थी यूं ही रेत में उंगलियां ग़ौर से देखा तो तेरा अक़्स बन गया