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मेरी इल्तिजा

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ये इल्तिजा है मेरी रहमत की निगा ह  रखने वाले से वो निगहबान तुम्हारा रहे सदा ना आए कोई ग़म का शूल आपकी राह में दामन महका रहे यूं ही खुशियों के फूलों से सदा बढ़ते रहो इस क़दर मुकाम पर अपने जैसे पूर्णिमा के चांद की चमक बिखर जाए आपके नाम की खुशबू जहां में महक उठे इस कदर तुम्हारी जिंदगानी का चमन कभी जो आए अंधेरा साया तुम्हारे जीवन में कदम ना डगमगाने पाए घबराकर हौसला जगाए रखना अंतरात्मा में छठ जाएगा यही बादल तुम्हें कामयाबी का मुंह दिखाकर जगाना ऐसी सर्द चांदनी जीवन में के लोग चकोर बनकर उसे छूना चाहे लेकिन तुम्हारे चांद से किरदार पे कभी गुमान का ग्रहण न लगने पाए

एक नज़र इधर भी देख लो

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  जुबां थमे, नज़र रुके, क़यामत बरपे तुम जो एक बार सलीके से दुपट्टा औढ़ लो उड़ रही है तुम्हारे बदन की खुशबू झुलस रही है नमी आवारा हवाओं से ताल्लुक़ रखना छोड़ दो अपने दुपट्टे को संभालो पैर पड़ जाए ना किसी का फ़ुज़ूल रिश्तों को बेकार में निभाना छोड़ दो फूलों से कहो कांटो से तुम्हें कोई ख़तरा नहीं शाख से लगे रहना है तो ताका-झांकी छोड़ दो मेरी शिकायतें नहीं तो ऐसा नहीं मैं परेशां नहीं मजबूरियों को मेरी आदत समझना छोड़ दो आजकल घबराया हुआ सा रहता हूं मैं बहुत हाथ सीने पे रख मेरी ज़िंदगी को नया मोड़ दो पाश-पाश हो गया है मेरा शीशा ए दिल जोड़ दो देख लो खुद को, आईना तोड़ दो

एक शख़्स

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मैं गुमनामियों के अंधेरे में खोया था अब तलक ताज़्जुब है इस भीड़ में कोई मुझे पहचानता है जो उम्रभर मेरा ना हो सका बदनसीबी देखो मेरा ग़ैर का होने का बुरा मानता है मिट चले मेरी नज़र से जिहालत के अंधेरे वो शख़्स पराया है जो ख़ुद को मेरा मानता है कोई ना पढ़ सका मेरे चेहरे की लिखावट के राज़  एक खुदा है जो मेरा हाल बखूबी जानता है वैसे तो मेरी तबीयत में कोई फ़र्क नहीं आता एक वो एक नज़र से मुझे लड़खड़ाने का हुनर जानता है।