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बदलता मौसम - Nazm

कहीं अर्थी पे मातम है, कहीं डोली पे बहार आई कहीं अश्कों का मौसम है, कहीं खुदग़र्जी नज़र आई कहीं चौखट पे पाबंदी, कहीं जलसें में बहार आई कहीं एहतियात फ़रमाई, कहीं जमात फ़रमाई कहीं दूरियों का मौसम, कहीं जमघट पे हवा आई किसी की हयात ना रही, किसी ने कर दी बेहयाई कहीं दहशत का आलम है, कहीं वहशत है छाई कहीं पे झूठ फैलाया, कहीं लाशें बिछाई

खामोश हसरत | Khamosh Hasrat | Anil Satyam

बरसों के बाद उनकी सूरत जो देख ली बेबात रो पड़े हैं एक भूली सी याद पे दिल्लगी की थी हमने वो मुस्कुराएंगे वो रूठ ही जा बैठे इस छोटी-सी बात पे ज़्यादती हमारे साथ आशिकी में हो गई दिल को जो हमने रख दिया नादां के हाथ पे कभी भूलने भी ना देता है उनका ख़याल मुझको वो रूठना-मनजाना उनका बात-बात पे कोशिश मेरी सब बेकार ही रही भूल पाने की यादें उनकी बढ़ती चली जब हर सांस पे वो एक दफ़ा तो कहते तुमसे प्यार है हम हद से गुजर जाते इतनी-सी बात पे मैं भी जुदा उससे वो भी जुदा-जुदा एक-दूसरे से हो गए जुदा, जुदा-सी बात पे