भारत की माता ‘शूद्र’ (लेख)

हड़प्पा सभ्यता, नागवंश, वेद-पुराण व पुरा तत्वों के आधार पर भारत में रहने वाली प्रत्येक आदिवासी मलनिवासी स्त्री शूद्र (अनार्य) यानि नागवंशी या मौर्य व द्रविड़ वंश की हैं।

    इतिहास गवाह है कि जब आर्य शोध में जिनका DNA R1A1 के रूप में पाया गया मध्य एशिया से भारत को लूटने के उद्देश्य से आये तो ये लोग भी अरब-लूटेरों की ही तरह अपने साथ एक भी महिला को नहीं लेकर आये थे। उन्होंने लोहे की खोज कर ली थी और इन्हीं हथियारों के बल पर यहां के आदिवासी मूलनिवासियों जिनका DNA L3MN है की युद्ध में जीती हुई शूद्र स्त्रियां (अनार्य) यानि नागवंशी या मौर्य व दविड़ वंश से विवाह रचाया तथा यहां के निवासी बनकर र्स्वस्त पर अपना अधिपत्य स्थापित करने हेतु मनुस्मृति लिख ब्राह्मणवाद की स्थापना की। रक्त की शुद्धता बनाए रखने हेतु जातियां बनाई तथा स्त्रियों को शूद् श्रेणी में रख पुरूष-शुद्रों की तरह ही उन पर भी कड़े नियम लागू किए जैसे- गुलामी, अशिक्षा तथा अन्याय आदि। स्त्रियों को बच्चे पैदा करने तथा उनका शारीरिक शोषण करने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता था इसीलिए स्त्रियों को इतनी निम्न श्रेणी में रखा। इसके बाद मूल निवासियों के मूल बौद्ध धर्म को समाप्त करके और बुद्ध मूर्तियों तथा बौद्ध विहारों को परिवर्तित करके इन्होंने आर्य परंपरा की स्थापना की। आज भारत में जिस भी जाति-धर्म के लोग निवास कर रहे हैं चाहे वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या फिर शूद्र हो उनके परिवार की प्रत्येक स्त्री शूद्र जाति की है। अब तो यह बात DNA जांच से भी साबित हो चुकी है।

    मैं भारत के निवासियों को यह कहना चाहता हूँ कि भविष्य में यदि कोई शूद्रों से घृणा करता है तो सबसे पहले वो अपनी मां-बहिन या परिवार की अन्य स्त्रियों से करें, क्योंकि जिनके पेट से उसने जन्म लिया है वो स्त्री भी एक शूद्र जाति की ही है, अगर वे ऐसा नहीं कर सकते तो फिर भारत की राष्ट्रीयता व एकता को भंग करने का उनकों कोई अधिकार नहीं।

    सभी स्त्रियां एक-दूसरे का सम्मान करें क्योंकि वह भारत की माता है और एक शूद्र है।


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