Ghazal (मुकम्मल) मौसम फिर से सुहाना हो गया है
मौसम फिर से सुहाना हो गया है किसी पर दिल दीवाना हो गया है उसकी गली से गुज़रे थे हम इक दिन अब उसी से आना-जाना हो गया है दो घड़ी उसकी निगाहों में जो देखा दिल हमारा उसका निशाना हो गया है जब भी मिलने की करूँ बात उससे टालते-टालते ज़माना हो गया है ग़ैर से मिलने में है वो बे-तकल्लुफ़ मुझको मिलना भी बहाना हो गया है अब तू इज़हार करे या फिर इनकार तेरा दिल में ठिकाना हो गया है लोगों से छुप-छुप के तुझे देखता हूँ इश्क़ मेरा अब बहुत पुराना हो गया