एक रोमांचक कहानी
यह उस समय की बात थी, जब बहुत काली रात थी। ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी, पत्ता-पत्ता ठंड के कारण ठिठुर रहा था। मैं अपनी सेना की टुकड़ी के साथ जंगल में था, तब मुझको एक संदेश मिला कि दुश्मनों ने घेर लिया है तुमको, वे हमारी सीमाओं की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
मैंने जैसे ही संदेश सुना, मेरा शरीर काँप उठा। मैंने झट से अपने सैनिकों को तैयार किया और फिर एक छोटी पहाड़ी से हमला बोल दिया। चारों तरफ गोलियाँ चलने लगीं, मानो ठंडी रात में कोई भयानक तूफ़ान आ गया। हमारे सारे दुश्मन मारे गए। हमने चैन की साँस ली।
हम जंगल में आगे बढ़ ही रहे थे कि दुश्मनों के टैंक नज़र आती है। मेरे सिपाही बहादुरी से लड़े, लेकिन सभी मारे जाते हैं।
मैंने बड़ी बहादुरी से दुश्मन के टैंक्स को एक-एक कर नष्ट कर दिया। मैं बहुत थक चुका था। जंगल में शेर-भालू का भी डर था। थोड़ी दूरी पर मुझे पानी नज़र आया। मैंने अपनी बंदूक फेंकी और पानी पीने को आगे बढ़ा।
मैंने जैसे ही झील की तरफ हाथ बढ़ाया और अंजलि भर पानी मुँह के पास लाया, अचानक एक भयानक-सा चेहरा मेरे सामने आ गया। मैं एकदम खौफ़ खा गया। पलटकर देखा तो एक विशालकाय गोरिल्ला मेरी तरफ बढ़ रहा था। उसकी चिंघाड़ ने सारे जंगल में सनसनी पैदा कर दी। मेरा चेहरा खौफ़ के कारण पीला पड़ गया। मैं अपनी बंदूक की तरफ लपका और झट से दनादन-दनादन गोलियाँ चला डालीं, मगर उसकी तो खरोंच तक नहीं आई। गोलियाँ खत्म हो चुकी थीं।
मैं भय के कारण दौड़ा, वह भी मेरे पीछे बुरी तरह दौड़ने लगा। मैं दौड़ा, मदद को आवाज लगाइए लेकिन उस घने, सुनसान और अँधेरे जंगल में मेरी कौन सुनता। मेरी आवाज़ बड़े-बड़े पेड़ों से टकराकर रह गई। पत्तों की चैड़-चैड़ और हवा की सर-सराहट ने मेरे बदन में खौफ़ भर दिया। मेरे रोंगटे खड़े हो गए, गला सूख गया। ठंड भरी रात में मैं पसीने पसीने हो गया।
तभी भयानक-सा चेहरा फिर सामने आया। मैंने उसे देखा और दौड़ने की कोशिश की, परंतु मैं नाकाम हो गया। मेरे पाँव भय के कारण लड़खड़ा गए। तभी शैतान ने अपना एक बड़ा पंजा मेरी तरफ बढ़ाया और दबोचकर अपने बड़े-बड़े व नुकीले दाँतों से मुझे चबाने लगा।
इतने में ही मेरी आँख खुल गई। देखा तो यह सब एक स्वप्न था। मैं घबराया और बदन पसीने से भरा हुआ था। मेरे हाथ-पैर काँप रहे थे। यह सब मेरी समझ में नहीं आ रहा था।
फिर मुझे याद आया कि मैंने पिताजी के अनुसार रात में सोने से पहले पानी नहीं पिया था। इसी कारण मेरे साथ ऐसा हुआ।
मैंने अपनी गलती मानी कि अब रात में ज़रूर पियूंगा पानी।

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