Sher (✓)
दीदार-ए-यार भी यहाँ महँगा बहुत हुआ, मुद्दत से मुंतज़िर हूँ तिरी इक झलक को मैं। फ़क़त तुझ से इतना सवाल है मेरा, तिरे दिल में क्या कुछ मलाल है मेरा? भुला देगा तू मुझ को मालूम है सब, तुझे याद रखना कमाल है मेरा। तेरी नज़रों से जब नज़र मिलती है मरीज़-ए-अलम को शिफ़ा मिलती है तिरे रूबरू जब मैं आता हूँ जानाँ मुझे इक नई ज़िन्दगी मिलती है