Sher 11 ना-खुदाई (मुकम्मल)

बात जब से उस से बनी है, ज़माने से तनातनी है,
मैं भी हूँ वफ़ादार उस से, वो भी सनातनी है।

ना काफ़िर हूँ, ना जन्नत का त़ालिब हूँ मैं,
एक क़लंदर हूँ, अपने दिल का मालिक हूँ मैं

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