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अंबेडकर और मगरमच्छ

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यह वास्तविक घटना दिल्ली के आर. के. पुरम गांव की है। गांव में एक व्यक्ति रहता था जो कि बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का बहुत बड़ा अनुयाई और भक्त था। वह सुबह सवेरे उठता तो सबसे पहले बाबा साहब की प्रतिमा को नमन करता था। दिन के किसी भी पहर जब भी वह किसी अन्य व्यक्ति से मिलता तो उसे "जय भीम" बोलकर सत्कार किया करता था। उसने बाबा साहब की अनेकों किताबों का अध्ययन कर बहुत बड़े पैमाने पर ज्ञान अर्जित किया था। बाबा साहब के विचार सदैव उसके मस्तिष्क पर छाए रहते थे। एक रात की बात है जब वह गहन निद्रा में सोया हुआ था तो उसने एक सपना देखा जिसमें उसने ख़ुद को एक तालाब के किनारे पाया। उसने जैसे ही तालाब के अंदर पानी पीने के लिए अपना एक पैर रखा तो वहां पहले से ही घात लगाएं बैठे एक मगरमच्छ ने उसका पैर अपने जबड़े में दबोच लिया और धीरे-धीरे पानी के अंदर खींचने लगा। अब वह बहुत ज्यादा घबरा गया, उसे कुछ नहीं सूझ रहा था। उसने अपना पैर छुड़ाने का बहुत प्रयास किया परंतु असमर्थ रहा। पीड़ा ज्यादा होने के कारण उसके मुंह से एक आवाज़़ निकली "हे! बाबा साहब मुझे बचाओ।" इतना कहते ही बाबा साहब हाथ मे...

भारत और भरत?

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कईं मिथक प्रमाणों के आधार पर हमें यह पढ़ाया जाता है कि हमारे देश भारत का नाम राजा सर्वदमन यानी भरत के नाम पर पड़ा। जहां वह पैदा हुए थे वह जगह अब अफगानिस्तान में है।  व्याकरणिक दृष्टि से देखा जाए तो भरत के नाम पर पड़ने के कारण तो इसका नाम भरतवर्त, भरतपुर, भरत नगरी, भरत विहार आदि होना चाहिए था। मुझे सचमुच बहुत आश्चर्य है कि कोई अपने नाम को क्यों विकृत होने देगा। "भ+र+त" नाम में वर्ण "भ" के साथ "भ+।" क्यों जोड़ देगा और इसे "भ+।+र+त" क्यों बना देगा। यह बात हर सिरे से अतार्किक लगती है। कुछ जातिगत लोग और धर्म के ठेकेदार आज भी ऐसे-ऐसे प्रयोग करते रहते हैं। मैं आपको एक उदाहरण के माध्यम से समझाता हूं- "हमारा देश भारत एक पुलिंग शब्द है" लेकिन फिर भी कुछ लोग इसे भारत माता बोलते रहते हैं जो कि भाषाई व व्याकरणिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है। यदि बात वास्तविकता की करें तो भारत देश का नाम यहां आदिकाल से रहने वाली एक कबीलाई अनुसूचित जनजाति के नाम पर पड़ा है। "इस कबीलाई जाति का नाम ही भारत था, परंतु कुछ जालसाज लोगों ने भारत की वास्तविक संस्कृति या...

भुला नहीं सका जिसे - कविता

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मैंने देखा था उसे भुला नहीं सका जिसे। नैंनों से क्षणभर औझल नहीं किया जिसे।। मुझें अच्छी तरह याद है, वो दिन का पहर घन थे गगन मे उमड़े, शीतल थी दोपहर। मनमोहक, आकर्षक वातावरण था और मंद गति में वायु लहरत-लहर मैंने देखा था उसे --------------------------- मिली एक युवती मुझे लड़कियां काटते हुए शांत, सरल स्वभाव से कार्यरत होते हुए। मुख-मंडल पर ओज था,  लीन थी  कर्म अपना कर्त्तव्य समझते हुए।। मैंने देखा था उसे --------------------------- प्रसन्नचित आँखें, आकर्षण परिपूर्ण युवा अवस्था में प्रवेश पाया था। सावल तन में योग्यता थी और यौवन सिर मंडराया था।। मैंने देखा था उसे --------------------------- आकर्षक रूप, संस्कार का पहरा था आँखें सुंदर, रंग झील-सा गहरा था। ना मिला कोई उसके समरूप व्यर्थ संसार यह सारा था। मैंने देखा था उसे ---------------------------  मैं वृक्ष की छाँव से उसे निहार रहा था देखा मुझे तो स्वयं में सिमटने लगी। नैंन झुकाएं, दृष्टि बचाई तदोप्तरांत कार्य करने लगी।। मैंने देखा था उसे --------------------------- आज भी स्वप्न में, मैं देखता हूँ उसे मेरे पहले प्रेम ने चुना था ...

अधूरा जहां | Adhura Jahan

चलो मुकम्मल फिर से जहां अपना करें बिछड़े हुए हैं बरसों से आओ सुलह करें आओ करें यह वादा एक बार फिर से हम एक-दूसरे से फिर कभी ना धोखा करें जब प्यार मेरे दिल में है, तेरी आंखों में भी क्यों देख-देख एक-दूसरे को आहे भरे हरपल जुदाई में गुजरा, दो पल दामन में है खोना नहीं तकरार में, आओ प्यार ही प्यार करें वक्त जो आने वाला है बहोत मुश्किल होगा चलो मुश्किलों के साथ लड़ने का इरादा करें चलो मुकम्मल फिर से...

बदलता मौसम - Nazm

कहीं अर्थी पे मातम है, कहीं डोली पे बहार आई कहीं अश्कों का मौसम है, कहीं खुदग़र्जी नज़र आई कहीं चौखट पे पाबंदी, कहीं जलसें में बहार आई कहीं एहतियात फ़रमाई, कहीं जमात फ़रमाई कहीं दूरियों का मौसम, कहीं जमघट पे हवा आई किसी की हयात ना रही, किसी ने कर दी बेहयाई कहीं दहशत का आलम है, कहीं वहशत है छाई कहीं पे झूठ फैलाया, कहीं लाशें बिछाई

खामोश हसरत | Khamosh Hasrat | Anil Satyam

बरसों के बाद उनकी सूरत जो देख ली बेबात रो पड़े हैं एक भूली सी याद पे दिल्लगी की थी हमने वो मुस्कुराएंगे वो रूठ ही जा बैठे इस छोटी-सी बात पे ज़्यादती हमारे साथ आशिकी में हो गई दिल को जो हमने रख दिया नादां के हाथ पे कभी भूलने भी ना देता है उनका ख़याल मुझको वो रूठना-मनजाना उनका बात-बात पे कोशिश मेरी सब बेकार ही रही भूल पाने की यादें उनकी बढ़ती चली जब हर सांस पे वो एक दफ़ा तो कहते तुमसे प्यार है हम हद से गुजर जाते इतनी-सी बात पे मैं भी जुदा उससे वो भी जुदा-जुदा एक-दूसरे से हो गए जुदा, जुदा-सी बात पे

दीदार ए बेवफा | Deedar E Bewafa | Anil Satyam

जचता नहीं आंखों को किसी और का दीदार अपनी नज़र में जब से तेरी मूरत उतार दी गैरों पे ना आ जाए मेरा दिल तेरा आशिक किसी हंसीं को देखने की तमन्ना ही मार दी कितना तुम्हें चाहते हैं उन हसीनों से पूछो रो-रो के मेरी याद में जिन्होंने जिंदगी गुजार दी तक़ाज़ा किसी खुदगर्ज़ ने हमसे ऐसा किया अपनी खुशी भी हमने तो गैरों पे वार दी जब रो दिए वो आके मेरी नज़रों के सामने के ख़ुद को मिटा चले उनकी जिंदगी संवार दी समझा था जिसको एक रोज़ हमनशीं उसी ने छुरी धोखे से दिल में उतार दी उस बेवफ़ा को बख़्शा तहे-दिल से फ़ज़ल हमने पर इज़्ज़त उसकी उसी की नज़रों में उतार दी मिसाल मोहब्बत की हम तो क़ायम कर चले 'सत्यं' पर क्यों धड़कते दिल की किसी ने दुनिया उजाड़ दी