Posts

Sher 2 (मुकम्मल)

Image
बात लफ़्ज़ों में हो लाज़िमी तो नहीं ख़मुशी भी कहती है हाल ए दिल यहां दिल बड़ा चाहिए इश्क़ उनसे छुपाने को हर किसी से तो यह तूफ़ां संभाला नहीं जाता जब तुझे आदत मेरी लग जाएगी तू मिरी हालत को समझ पाएगी जब भी फुर्क़त ने तेरी सताया मुझे मूंद कर आंखें सूरत तिरी देखा किये तेरे रुख़ पे जज़्बात की शबनम लिपटी है, अब मैं प्यार समझूँ या परेशानी कहूँ इसे मुझे कोई बेबाक ही सा समझ रक्खा है? फिर इश्क़ तुझे खाक़ ही सा समझ रक्खा है? प्यार क्या है ये बीमार को पता है शिफ़ा है या सज़ा समझदार को पता है

ग़ज़ल (मुकम्मल) सबके हिस्से हिस्सेदारी होनी चाहिए

सबके हिस्से हिस्सेदारी होनी चाहिए सबकी अपनी ज़िम्मेदारी होनी चाहिए ख़ुद की ख़ातिर ख़ुद से भी फ़ुर्सत मांगा करो आंखों में इतनी ख़ुद्दारी होनी चाहिए इक मैं ही बेइंतेहा तुझपे मरता रहूं मिरे दिल पे तिरी दावेदारी होनी चाहिए रस्ता लंबा है दोनों की मंज़िल एक है हम में कोई रिश्तेदारी होनी चाहिए धोखा अपने ही दे देते हैं अक्सर यहां अपनी मुट्ठी में दुनियादारी होनी चाहिए कुछ ऐसे कर कायम हरसू अपना रुतबा हर गली कूचे में ताबेदारी होनी चाहिए

अंधेरे का सूरज (ग़ज़ल) मुकम्मल

Image
अंधेरे का सूरज निकाला जा रहा है، संभले हालात को संभाला जा रहा है। सच को हर सूरत छुपाया जाता है، झूठ का अख़बार निकाला जा रहा है। कट रही उँगलियाँ, नोचे जा रहे जिस्म، ग़रीब को दहशत में ढाला जा रहा है। मौसम की नज़ाकत समझो दौर-ए-हाज़िर में، पगड़ियों को सरे-आम उछाला जा रहा है। कल उँगली पकड़ जिनके यतीम बड़े हुए، उनकी परवरिश में नुक़्स निकाला जा रहा है। कई साँप जकड़े हैं इस सोने की चिड़िया को، पालने वाले पर इल्ज़ाम डाला जा रहा है। रखो नज़र दहलीज़ पर ये दौर तुम्हारा है، हमारी पुरानी आँखों का उजाला जा रहा है। मिसाले-मोहब्बत इस क़दर करो क़ायम، जो देखे यही कहे—हिंदुस्तान वाला जा रहा है।

समंदर से भी यार

Image
समंदर से भी यार-यारी रखा करो, या पार जाने की तैयारी रखा करो। घर जाओ तुम तो आईना ज़रूर देखना, अपनी भी थोड़ी ज़िम्मेदारी रखा करो। संभलकर उड़ो आसमानों की ऊँचाई पर, शाहीन से भी अपनी पहरेदारी रखा करो। पेड़ लगाए हैं तो पत्थरबाज़ों से होशियार, कच्चे फलों पे भी निगरानी रखा करो। हमें ये पता चला कि वो बेवफ़ा है, आईने, तुम न यूँ जी-भारी रखा करो। घर के अंदर दग़ाबाज़ भी दुश्मन से कम नहीं, चिराग़ों पे अपनी रोशनी सारी रखा करो।

वो जा चुका है (ग़ज़ल) मुकम्मल

Image
वो जा चुका है अपनी गिरफ़्त से निकल के, हम ही उलझे रह गए जाल में सिर डाल के। वैसे तो वो ग़ैर से भी खुल के मिलता है, हम ही आदमी न निकले उसके ख़याल के। उसका रिश्ता फ़क़त सफ़ेद-झूठ पर टिका था, कैसे मुकम्मल देता जवाब हर सवाल के। उस बे-मुरव्वत ने बेरुख़ी की हदें कर दीं, हम देखते रहे तमाशे उसके कमाल के। उम्र-भर की चाहत का बदला यूँ मिला हमको, हिस्से में आए क़िस्से बस उसके मलाल के। अब जो मिला है तजुर्बा उसे खोकर ये जाना, मोहब्बत में उठते हैं क़दम बहुत सँभाल के।

मेरे जाने के बाद | Mere jane ke baad (Ghazal)

Image
ये रास्ते, ये फ़िज़ाएं, यहीं रह जाएंगे, कल के लिए और रह जाएंगी मेरी यादें, मेरे जाने के बाद हमें कमसिनी में घर से निकाला गया था, बे-कसूर मेरे वालिद ने ये बताया था, जी भर आने के बाद तुम्हें आंख भरके कोई ना देखेगा, ज़माने में बहुत रुलाएंगी कुछ बातें, मां-बाप गुजर जाने के बाद अब वो बद-मिज़ाज बर्दाश्त की हद से गुजरने लगा आ गया है सलीक़ा उसे, बेटी घर आ जाने के बाद मैंने भी अब अपने दिल को, पत्थर का कर लिया मयख़ाना चला जाता हूं, उसकी याद आ जाने के बाद मैं अक्सर सोचता हूं, कोई ग़ज़ल अपने हालत पे लिखूं मोहब्बत ही लिख जाता है, कलम हाथ में आ जाने के बाद यह जो गुरूर है मेरा, तेरी बेरुख़ी पे टिका है उतर जाता है नशे-सा, मोहब्बत से बुला लेने के बाद उलझ-उलझ-सी गई ज़िन्दगी, सबको अपना कहते-कहते आसान बनाया है इसे, सबको औकात पे लाने के बाद पुरानी ईट सही हम के बे-कद्री से ना फेंक हमें ही अलग कर रहे हो, हमसे सर छुपाने के बाद

तेरे जाने के बाद (नज़्म) Nazm

Image
सोचा ना था मैं बिखर जाऊंगा, तेरे जाने के बाद आज फिर याद आ रहा है तू, तेरे जाने के बाद फिर ग़म ने ली है करवट, तुझे भूलाने के बाद हम अक्सर रोते हैं तन्हाई में, तेरे जाने के बाद  सफ़र तन्हा ही है हमारा, तेरा ना आने के बाद दिन-सहरा रात-क़यामत है, तेरे जाने के बाद उठते हैं दुआ में हाथ मेरे, याद तेरी आने के बाद बिगड़ते जा रहे हैं हालात मेरे, तेरे जाने के बाद रुला गया तू उम्रभर को, एक-पल हंसाने के बाद बे-दिली ओढ़ ली है मैंने, तेरे जाने के बाद