Ghazal (मुकम्मल) पुरानी ईंट सही हम
ये रास्ते, ये सफ़र रह जाएँगे मेरे जाने के बाद
और रह जाएँगी मेरी यादें मेरे जाने के बाद
तुम्हें आँख भर के कोई न देखेगा ज़माने में
बहुत रुलाएँगी बातें माँ-बाप गुज़र जाने के बाद
हमें कमसिनी में घर से निकाला गया बे-क़सूर
मेरे वालिद ने ये बताया जी भर आने के बाद
वो बद-मिज़ाज अब बदज़ुबानी सहने लगा
आ गया उसे सलीक़ा बेटी घर आने के बाद
ये जो गुरूर है मेरा तेरी बेरुख़ी पे टिका
उतर जाता है नशे-सा हँस के बुलाने के बाद
मैं सोचता हूँ कोई ग़ज़ल अपने हालात पे लिखूँ
मुहब्बत लिख जाता है क़लम उठाने के बाद
उलझ गई थी ज़िंदगी सबको अपना कहते-कहते
आसान कर लिया सबको औक़ात पे लाने के बाद
पुरानी ईंट सही हम, तू बे-क़द्री से न फेंक
हमें ही अलग किया हमसे सिर छुपाने के बाद
और रह जाएँगी मेरी यादें मेरे जाने के बाद
तुम्हें आँख भर के कोई न देखेगा ज़माने में
बहुत रुलाएँगी बातें माँ-बाप गुज़र जाने के बाद
हमें कमसिनी में घर से निकाला गया बे-क़सूर
मेरे वालिद ने ये बताया जी भर आने के बाद
वो बद-मिज़ाज अब बदज़ुबानी सहने लगा
आ गया उसे सलीक़ा बेटी घर आने के बाद
ये जो गुरूर है मेरा तेरी बेरुख़ी पे टिका
उतर जाता है नशे-सा हँस के बुलाने के बाद
मैं सोचता हूँ कोई ग़ज़ल अपने हालात पे लिखूँ
मुहब्बत लिख जाता है क़लम उठाने के बाद
उलझ गई थी ज़िंदगी सबको अपना कहते-कहते
आसान कर लिया सबको औक़ात पे लाने के बाद
पुरानी ईंट सही हम, तू बे-क़द्री से न फेंक
हमें ही अलग किया हमसे सिर छुपाने के बाद
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