Sher | 4 लाइन शायरी




तुझे अपने दिल में बसा रखा है,
खज़ाना जहाँ से छुपा रखा है।
​ज़माना खड़ा है खिलाफ़ अब मेरे,
मगर हाथ तुझसे मिला रखा है।

मोहब्बत जिससे भी मुझको ज़रा हो जाती है,
वह मेरी जान से ज़्यादा मुझे हो जाती है।
उसे पलकों पे अपनी मैं बिठा कर रखता हूँ,
जो मेरी हो जाती है मेरी हो जाती है।

कई दर्द से रोज़ उभरती हूँ मैं,
कई आँखों से छुप निकलती हूँ मैं।
जियूँ अपने ही तौर से, आरज़ू थी,
ना-मर्ज़ी मगर राह बदलती हूँ मैं।



मैं सितारों से सरगोशी करता हूं,
जुगनुओं को रातभर खलता हूं।
न देखो मुझे इतना गौर से यार
मैं आंखों पर असर करता हूं।

उसके सच झूठ में बदलने लगे,
सोचते ही आँसू निकलने लगे।
वो बेवफ़ा करता था वफ़ा की बात,
आज सोचा तो दम ही निकलने लगे।


सबके हिस्से हिस्से-दारी होनी चाहिए
सबकी चादर-ओ-दीवारी होनी चाहिए
बर्तन खाली चूल्हा ठंडा ही सही
आँखों में 'सत्यं' ख़ुद्दारी होनी चाहिए

ज़ख़्म मेरे अब मुस्कुराने लगे
वो हमें और भी आज़माने लगे
​सजाए उसने फूल अपने बालों में
भँवरे आगे-पीछे गुनगुनाने लगे

बदन में मचलती हरारत सी है,
तेरे वास्ते ये बशारत सी है।
इजाज़त हो बाहों में भर लूँ तुझे,
कि जागी तबीयत में शरारत सी है।

वो मेरी हद-ए-तसव्वुर से गुज़रता क्यों नहीं
नशा उसके अन्दाज़ का उतरता क्यों नहीं
मैं हैरान हूँ ये सोचकर उसके बारे में
ढलता है वक़्त, हुस्न उसका ढलता क्यों नहीं

उजाले कफ़न ओढ़कर सोने लगे
सहारे सिरों को झुका रोने लगे
जहाँ देखो हर तरफ मातम है छाया
फ़रिश्ते ख़ुदा की मौत पर रोने लगे

अलग सोच ज़माने की बना लेनी चाहिए,
उठे जो भी सदाएँ, वो दबा देनी चाहिए।
ज़रूरी नहीं शमशीर क़त्ल को ही उठे,
दहशतगर्दी को भी लहरा देनी चाहिए।

मेरे दिल में वो शम्अ-ए-मुहब्बत जलाता रहा
मेरे जुनून पर कामयाबी का रास्ता बनाता रहा
जिसे लेकर गया था मैं एक रोज़ बुलंदी पर
वही अपनी नज़र से मुझे गिराता रहा

ख़ामोशियाँ सुनो तो सुनाई देती हैं
ख़्वाहिशें आँखों में दिखाई देती हैं
तुम मानो या न मानो कोई बात नहीं
तेरी आवाज़ मोहब्बत की गवाही देती है


एक ज़माना लगा मुझे, तेरी मोहब्बत कमाने में
वक़्त नहीं लगता था मुझे वक़्त गवाने में
तेरी सारी तस्वीरें जला डाली मैंने एक-एक कर
बाख़ुदा हाथ कांपने लगे, आख़िरी तस्वीर जलाने में

मेरे मुंह से जो निकले हर बात दुआ हो जाए
सज़ा ऐसी मिले उसे, वो रिहा हो जाए
वो लोग जो समझते हैं, उनका ही दिल धड़कता है
वो भी इश्क में इतना तड़पे, मेरे बराबर में खड़ा हो जाए

यह जो इश्क है मेरा बदनाम नहीं होना चाहिए
मुहब्बत पे मेरी कोई इल्ज़ाम नहीं होना चाहिए
दर्द-ए-दिल की दवा करो मुझे ऐतराज नहीं
पर तबीयत में मेरी आराम नहीं होना चाहिए

छुपाकर ज़माने से राज़ तेरा, दिल में दफ़न कर लूं
अपनी मैय्यत पे ओढ़ लूं, तुझको कफ़न कर लूं
ये जो ग़म तेरा, मिला मुझे, सबसे हसीन है
बता कैसे किसी ग़ैर को, मैं इसमें शारीक़ कर लूं

इस आलम में तेरा मुझे छू जाना जरूरी है
खुशबू बनके रूह में उतर जाना जरूरी है
मेरे सफ़र में उठ रहे हैं गर्दिशों के गुबार
तेरे दामन का मेरे सर पे बिखर जाना जरूरी है

तुम्हें ऊपर से जो बताया जा रहा है सच नहीं है
ख़्याल दिल में जो उगाया
जा रहा है सच नहीं है
तुम मुझे देखते फिरते हो दुनिया की नज़र से
मेरी आंखों में आकर पढ़ लो सच नहीं है

तेरी जुल्फ़े इस कलंदर को ज़ंजीर क्या करेगी
हौसला ग़र फ़ौलादी हो तो शमशीर क्या करेगी
मैं अग़र गिर के संभल जाऊं तेरी आंखों से
फिर तू ही बता मेरे लिए नई तरकीब क्या करेगी

वो शख़्स इश्क़ की गली से गुजरा बड़ा मुतमइन
अब कैसे कटेंगे उसके लम्हात तेरे-बिन
एक कबूतर को न जाने कौन-सा रोग़ लग गया
कराहता फिरता है, सुबह-शाम-रात-दिन

पहले उसने मुझसे बिछड़ने के बहाने ढूंढे
और फिर, फिर-मिलने के कई ज़माने ढूंढ़े
बेकरार मैं भी था, बहुत वो भी थी मग़र
दुनिया दीवार बन गई जब रिश्ते हमने पुराने ढूंढे

कईं राज़ मैनें सीने में उतार रखे हैं
बहते आंसू आंखों में संभाल रखे हैं
यूं ना आज़माइश करो मेरे सब्र की
मैंने कईं चांद जमीं पे उतार रखे है

मैं सुनाऊंगा दास्ताने-इश्क, कोई सवाल तो दे
अश्क छिपा सकूं महफ़िल में, रुमाल तो दे
इतना भी नहीं आसां यह राज़ बताना
मेरे हाथों में छलकता एक जाम तो दे।

इस प्यास में प्यार की सौगात मिल जाए
तपती ज़मीं को अल्हड़ कोई बरसात मिल जाए
हाथ मिलाना तो जैसे ग़ैर-ज़रूरी है
जरूरी ये है बहोत के ख़यालात मिल जाए

वो रहे खुदा सलामत एहसान इतना कर दे
दूर से ही सही दीदार का इंतज़ाम कर दे
तू डाल दे ज़माने की खुशियां उनके दामन में
बस सारे रंजो-ग़म एक मेरे नाम कर दे
 
फिज़ूल ही झुकाए कोई नज़रों को अपनी
अनोखा अंदाज़ झलक ही जाता है
कितना ही संभाले कोई जवानी का जाम
मोहब्बत का कतरा छलक ही जाता है
 
तेरी सूरत हमने पलकों में छुपा रखी है
बीती हर बात दिल में दबा रखी है
तू नहीं शामिल मेरी ज़िंदगी में तो क्या
तेरी याद आज भी सीने से लगा रखी है
 
कईं बहारें आई आकर चली गई
मेरे दिल के आंगन में कोई गुल नहीं खिला
हाले-दिल सुना सकता मैं जिसके सामने
मुझको पहले आप-सा बस दोस्त नहीं मिला
 
मैं ज़िंदगी में थक के चूर हो गया हूं
हालात के हाथों मजबूर हो गया हूं
एक ख्वाहिश थी तेरे नज़दीक आने की
पर किस्मत से बहुत दूर हो गया हूं
 
थामा है मेरा हाथ तो छोड़ ना देना
रास्ता दिखा के प्यार का मुंह मोड़ना लेना
तुम्हें देखता हूं मैं जिसमें सुबह-शाम
मेरे विश्वास के आईने को तोड़ ना देना

एक रोज़ मेरी ज़िंदगी में वो भी शरीक थी
वो चाहत बनके मेरे दिल के करीब थी
मैं समझा था मोहब्बत में मिलेंगे हसीन पल
नज़दीक से देखा तो जुदाई नसीब थी

क्या पाते हो मुझको सताकर
क्या मिलता है तुम्हें यूं दूर जाकर
एहसास होगा दिल में लग जाएगी जिस दिन
कैसा लगता है किसी के दिल को दुखाकर

तू बेरुखी ना करना चाहत ना दे सके ग़र
दूर से ही तुझे प्यार मैं कर लूंगा
ग़र लिखा है खुदा ने इंतज़ार मेरी किस्मत में
तो उमर भर तेरा इंतज़ार मैं कर लूंगा


ए ख़ुदा ये हसरत मेरी साकार तू कर दे
उसके दिल में मेरी तड़प का एहसास तू कर दे
जल उठे उसका दिल भी याद में मेरी
इस कदर कोई करामात तू कर दे

ए इलाही मुझपे इतना तो करम कर
ना दे सज़ा बेजुर्म बेबस पे रहम कर
फक़त प्यार में डूबा हूं है कोई गुनाह नहीं
है नाम तेरा ही दूजा इतनी तो शरम कर

थामा है मेरा हाथ तो छोड़ ना देना
रास्ता दिखा के प्यार का मुंह मोड़ना लेना
तुम्हें देखता हूं मैं जिसमें सुबह-शाम
मेरे विश्वास के आईने को तोड़ ना देना

हर तरफ फिज़ा में तेरा नाम लिखा है
मेरे लिए मोहब्बत का पैगाम लिखा है
मिटा ना देना ये गुज़ारिश है ए दोस्त
मैंने दिल के हर कोने में तेरा नाम लिखा है

एक रोज़ मेरी ज़िंदगी में वो भी शरीक थी
वो चाहत बनके मेरे दिल के करीब थी
मैं समझा था मोहब्बत में मिलेंगे हसीन पल
नज़दीक से देखा तो जुदाई नसीब थी

मैं ज़िंदगी में थक के चूर हो गया हूं
हालात के हाथों मजबूर हो गया हूं
इक ख्वाहिश थी तेरे नज़दीक आने की
पर किस्मत से बहुत दूर हो गया हूं

क्या पाते हो मुझको सताकर
क्या मिलता है तुम्हें यूं दूर जाकर
एहसास होगा दिल में लग जाएगी जिस दिन
कैसा लगता है किसी के दिल को दुखाकर

वो मेरे वज़ूद को बनाता जाता है
मुझमें उम्मीद जगाता जाता है
काश वो उकेर दे अपना नसीब भी मेरे हाथ पे
मेरा दिल यहीं सपना सजाता जाता है

ना उसने ही जुबां से इनकार से किया
ना मैंने ही जुबां से इकरार किया
ना वो मेरे इरादे जान सके
ना मैं उनके इरादे जान सका

ऐतबार ना रहा, अब तो सभी दगा देते हैं
आज यहां, दिल कल गैरों से लगा लेते हैं
प्यार की ऊंचाई पे ले जाकर बेवफा
धोखे की गहराई में गिरा देते हैं

कईं राज़ मैनें सीने में उतार रखे हैं
बहते आंसू आंखों में संभाल रखे हैं
यूं ना आज़माइश करो मेरे सब्र की
मैंने कईं चांद जमीं पे उतार रखे है

मैं सुनाऊंगा दास्ताने-इश्क कोई सवाल तो दे
अश्क छिपा सकूं महफ़िल में रुमाल तो दे
इतना भी नहीं आसां यह राज़ बताना
मेरे हाथों में छलकता एक जाम तो दे।

वो रहे खुदा सलामत, एहसान इतना कर दे
दूर से ही सही दीदार का इंतज़ाम कर दे
तू डाल दे ज़माने की खुशियां उनके दामन में
और सारे रंजो-ग़म उनके, एक मेरे नाम कर दे

इस प्यास में प्यार की सौगात मिल जाए
तपती ज़मीं को अल्हड़ कोई बरसात मिल जाए
हाथ मिलाना तो जैसे ग़ैर-ज़रूरी है
जरूरी ये है बहुत के ख़यालात मिल जाए

मैंने ठहरे आंसू को आंख से बहने ना दिया
छिपाकर रखा बहुत दर-ब-दर होने ना दिया
ये राज़ ना ज़ाहिर हो के बेकद्र दुनिया पे
ना मैंने कहा ना उसे ही कहने दिया

नामुमकिन सपने झूठा उनका प्यार दिया
धोखा खाया जो उन पर ऐतबार किया
तू जानता था ए खुदा वो मेरी किस्मत में नहीं
फिर क्यों मजाक ऐसा मेरे साथ किया

हवा को रुख मौसम को रंग बदलते देखा
चूर दिल को शोले सा जलता देखा
गिर जाता है जो इक बार इश्क की राह में
नहीं फिर उसको 'सत्यं' सम्भलते देखा

हर तमन्ना मेरी मचलती है
बातें साया बनकर चलती है
सुलगता है दिल मेरा घनी ज़ोर से
जब तेरी यादों की हवा चलती है


गर जेब में तेरी पैसा है
तो दुनिया पूछ लेती है तू कैसा है?
चंद लोग रिश्तों की अहमियत समझते हैं,
वरना हर शख्स यहां एक जैसा है।।

तू बेरुखी ना करना, चाहत ना दे सके ग़र
दूर से ही तुझे प्यार मैं कर लूंगा
ग़र लिखा है खुदा ने इंतज़ार मेरी किस्मत में
तो उम्र भर तेरा इंतज़ार मैं कर लूंगा

हर पल मुझको तेरी याद सताती है
कोई सदा जिगर के पार जाती है
जितना भुलाना चाहू तुझको ऐ सनम
तेरी याद और हद से बढ़ जाती है

फ़ुज़ूल ही झुकाए कोई नज़रों को अपनी
अनोखा अंदाज़ झलक ही जाता है
कितना ही संभाले कोई जवानी का जाम
मोहब्बत का कतरा छलक ही जाता है
 
तेरी सूरत हमने पलकों में छुपा रखी है
बीती हर बात दिल में दबा रखी है
तू नहीं शामिल मेरी ज़िंदगी में तो क्या
तेरी याद आज भी सीने से लगा रखी है

कईं बहारें आई आकर चली गई
मेरे दिल के आंगन में कोई गुल नहीं खिला
हाले-दिल सुना सकता मैं जिसके सामने
मुझको पहले आप-सा बस दोस्त नहीं मिला

ए इलाही मुझपे इतना तो करम कर
ना दे सज़ा बेजुर्म बेबस पे रहम कर ।
फक़त प्यार में डूबा हूं कोई गुनाह नहीं
है नाम तेरा ही दूजा इतनी तो शरम कर ।।

नामुमकिन सपने झूठा उनका प्यार दिया
धोखा खाया जो उन पर ऐतबार किया ।
तू जानता था ए खुदा वो मेरी किस्मत में नहीं
फिर क्यों मजाक ऐसा मेरे साथ किया ।।

हवा को रुख मौसम को रंग बदलते देखा
चूर दिल को शोलें सा जलता देखा ।
गिर जाता है जो इक बार इश्क की राह में
नहीं फिर उसको 'सत्यं' सम्भलते देखा ।।

प्यार का एहसास खुद में विश्वास
दर्द दिल में क्यों उनका दिया ।
तू जानता था खुदा वो मेरी किस्मत में नहीं
फिर क्यों मज़ाक ऐसा मेरे साथ किया ।।

हर तरफ फिज़ा में तेरा नाम लिखा है
मेरे लिए मोहब्बत का पैगाम लिखा है ।
मिटा ना देना ये गुज़ारिश है दोस्त
मैंने दिल के हर कोने में तेरा नाम लिखा है ।।

हर तमन्ना मेरी मचलती है
बातें साया बनकर चलती है ।
सुलगता है दिल मेरा घनी ज़ोर से
जब तेरी यादों की हवा चलती है ।।

ए खुदा ये हसरत मेरी साकार तू कर दे
उनके दिल में मेरी तड़प का एहसास तू कर दे।
जल उठे उनका दिल भी याद में मेरी
इस कदर कोई करामात तू कर दे ।।

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