Sher (मुकम्मल) राजनीति

अलग सोच ज़माने की बना लेनी चाहिए,
उठे जो भी सदाएँ, वो दबा देनी चाहिए।
ज़रूरी नहीं शमशीर क़त्ल को ही उठे,
दहशतगर्दी को भी लहरा देनी चाहिए।

उजाले कफ़न ओढ़कर सोने लगे
सहारे सिरों को झुका रोने लगे
जहाँ देखो हर तरफ मातम है छाया
फ़रिश्ते ख़ुदा की मौत पर रोने लगे

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