Sher (मुकम्मल)
तुझे अपने दिल में बसा रखा है,
खज़ाना जहाँ से छुपा रखा है।
ज़माना खड़ा है खिलाफ़ अब मेरे,
मगर हाथ तुझसे मिला रखा है।
सबके हिस्से हिस्से-दारी होनी चाहिए
सबकी चादर-ओ-दीवारी होनी चाहिए
बर्तन खाली चूल्हा ठंडा ही सही
आँखों में 'सत्यं' ख़ुद्दारी होनी चाहिए
ज़ख़्म मेरे अब मुस्कुराने लगे
वो हमें और भी आज़माने लगे
सजाए उसने फूल अपने बालों में
भँवरे आगे-पीछे गुनगुनाने लगे
Comments
Post a Comment