गजल (मुकम्मल) तुम्हें दिल में बसाया तो जाना है
कितनी हंसी है यह ज़िंदगी,
तुम्हें दिल में बसाया तो जाना है।
कैसे कहूँ मेरी प्रियतमा,
तुम्हें क्या-कुछ मैंने माना है।
हर पल तुम्हें चाहा-पूजा,
दूसरा दिल में नहीं लाना है।
हासिल की ख्वाहिश हो जो,
बस तू ही तो मेरा खजाना है।
कोई देखे तुम्हें देर तक,
तो मुमकिन मेरा जल जाना है।
कोई बात भी करे तुमसे,
मेरे बस में नहीं सह पाना है।
अपनी सारी खुशियाँ अब तो,
सिर्फ़ तुझ पर ही लुटाना है।
मेरी आरज़ू यही बाकी—
तुम्हें जिंदगी में लाना है।

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