वो ज़माना और था | Wo Zamana aur tha | وہ زمانا اور تھا

अब तो सरे-राह क़ायम होते हैं रिश्ते
वो शर्मो-हया में डूबा ज़माना और था

बस नुमाईश अदा होती है अब ख़ुदा परस्ती की
गुमनाम उसकी राह में लुटाना और था

इंसानियत में आजकल गरज़ नज़र आती है
कभी इंसान का इंसान के काम आना और था

वादों से मुकरने का 'सत्यं' रिवाज़ बन
बे-फ़र्ज़ भी अंज़ाम का ज़माना और था

आज भूल के वो खुद को झोली फैलाते हैं
कभी खैरात बाँटा किए वो ज़माना और था

कर काबू खुद पे के शमशीर हो या जबां
कभी बात का बात से बन जाना और था
 
दे दो जगह उसूलों को सीने में संभल जा
यह ज़माना और है, वो ज़माना और था

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