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बदलता मौसम - Nazm

कहीं अर्थी पे मातम है, कहीं डोली पे बहार आई कहीं अश्कों का मौसम है, कहीं खुदग़र्जी नज़र आई कहीं चौखट पे पाबंदी, कहीं जलसें में बहार आई कहीं एहतियात फ़रमाई, कहीं जमात फ़रमाई कहीं दूरियों का मौसम, कहीं जमघट पे हवा आई किसी की हयात ना रही, किसी ने कर दी बेहयाई कहीं दहशत का आलम है, कहीं वहशत है छाई कहीं पे झूठ फैलाया, कहीं लाशें बिछाई

खामोश हसरत | Khamosh Hasrat | Anil Satyam

बरसों के बाद उनकी सूरत जो देख ली बेबात रो पड़े हैं एक भूली सी याद पे दिल्लगी की थी हमने वो मुस्कुराएंगे वो रूठ ही जा बैठे इस छोटी-सी बात पे ज़्यादती हमारे साथ आशिकी में हो गई दिल को जो हमने रख दिया नादां के हाथ पे कभी भूलने भी ना देता है उनका ख़याल मुझको वो रूठना-मनजाना उनका बात-बात पे कोशिश मेरी सब बेकार ही रही भूल पाने की यादें उनकी बढ़ती चली जब हर सांस पे वो एक दफ़ा तो कहते तुमसे प्यार है हम हद से गुजर जाते इतनी-सी बात पे मैं भी जुदा उससे वो भी जुदा-जुदा एक-दूसरे से हो गए जुदा, जुदा-सी बात पे

दीदार ए बेवफा | Deedar E Bewafa | Anil Satyam

जचता नहीं आंखों को किसी और का दीदार अपनी नज़र में जब से तेरी मूरत उतार दी गैरों पे ना आ जाए मेरा दिल तेरा आशिक किसी हंसीं को देखने की तमन्ना ही मार दी कितना तुम्हें चाहते हैं उन हसीनों से पूछो रो-रो के मेरी याद में जिन्होंने जिंदगी गुजार दी तक़ाज़ा किसी खुदगर्ज़ ने हमसे ऐसा किया अपनी खुशी भी हमने तो गैरों पे वार दी जब रो दिए वो आके मेरी नज़रों के सामने के ख़ुद को मिटा चले उनकी जिंदगी संवार दी समझा था जिसको एक रोज़ हमनशीं उसी ने छुरी धोखे से दिल में उतार दी उस बेवफ़ा को बख़्शा तहे-दिल से फ़ज़ल हमने पर इज़्ज़त उसकी उसी की नज़रों में उतार दी मिसाल मोहब्बत की हम तो क़ायम कर चले 'सत्यं' पर क्यों धड़कते दिल की किसी ने दुनिया उजाड़ दी

जवाब दो तो जानू - एक सवाल

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एक सीमा नाम की लड़की ने एक ई-मेल पत्र का प्रिंटआउट दिखाते हुए पुलिस ऑफिसर से कहा कि सर मुझे अन्नी नाम के एक लड़के ने 14 फरवरी 1993 वैलेंटाइन-डे के दिन जिस समय दिल्ली स्थित स्कूल में मेरी इंग्लिश की क्लास चल रही थी, तब उसने मुझे भेजा था, और उसने मुझे जबरदस्ती प्रेम की धमकी दी। मैं उसके खिलाफ FIR दर्ज कराना चाहती हूं। तो क्या पुलिस ऑफिसर उसकी FIR दर्ज करेगा?  कारण के साथ सही विकल्प का चयन करें। A. उस दिन लड़की स्कूल नहीं आई थी B. लड़की के पास सबूत फर्जी है C. लड़की लड़के को फंसाना चाहती है D. उपरोक्त सभी   करण बताओ .......................................

भीख या मदद ? | Child Beggar in India | इंसानियत को शर्मसार करती एक कहानी

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कहानी एक बच्चा सड़क के किनारे भीख मांग रहा था, और इस कहानी का लेखक चाय की दुकान पर बैठा उसे देख रहा था। लेखक के इस तरह लगातार देखने पर बच्चे की निग़ाह उस पर पड़ी, तो वह थोड़ा मुस्कुराता हुआ लेखक की ओर बढ़ा और कुछ ही दूरी पर आकर खड़ा हो गया। लेखक ने उसकी तरफ देखा और थोड़ा वह भी मुस्कुराया, तो इस पर बच्चे की थोड़ी हिम्मत बढ़ी और वह बोला- साब कुछ दो ना। इस पर लेखक ने पूछा! क्या खाओगे? बच्चा   : कुछ नहीं साब! बस आप मुझे कुछ पैसे दे दो। लेखक : क्यों? भूख नहीं है! बच्चा   : है तो, लेकिन लेखक : बोलो-बोलो क्या बात है? बच्चा   : साब, मुझे दिन में एक ही वक़्त खाना खाने को कहा गया है। लेखक : आश्चर्यचकित होते हुए! क्यों मम्मी खाना नहीं देती? बच्चा   : नहीं, ऐसा नहीं है, सा...ब। लेखक : तो फिर क्या बात है? बच्चा   : वो......... कुछ नहीं साब लेखक : घबराओ मत। बोलो! बच्चा   : मेरे माता-पिता नहीं है, साब लेखक : औह गॉड! फिर आप रहते किसके साथ हो? बच्चा   : मेरे एक मुंह बोले अंकल है। वही मुझे अपने घर पर रखते हैं। लेखक : उन्होंने आपको स्कूल नह...

डॉ. अंबेडकर साहब के 15 नाम | 15 Names of Dr. Ambedkar

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 जय भीम सच्चा अंबेडकरवादी बाबा साहब के इन 15 नामों को आगे अवश्य शेयर करें| बाबा साहब संविधान निर्माता राष्ट्र निर्माता नारी मुक्तिदाता महाबोधि सत्व युग प्रवर्तक महामानव युगपुरुष आजीवन विद्यार्थी प्रकांड पंडित कलम का बादशाह एकता दाता समता दाता भारत भाग्य विधाता ज्ञान का प्रतीक

माता, पिता व संतान कौन है महान? | Mother, Father and Child

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माता (मां) - जननी जो कि अपनी संतान को 9 महीने तक गर्भ में रखती है और उसे सहती है, को जन्म देकर उसका पालन पोषण करती है। मां के बगैर अभी तक संसार में जीवोउत्पत्ति करना संभव नहीं है। स्त्री का जन्म ही मां बनकर संतान उत्पत्ति करने हेतु हुआ है, ताकि श्रृटि का संचालन होता रहें। 9 महीनों तक संतान को गर्भ में रखने का कष्ट ही मां को यह उच्च पद दिलाता है।  पिता (बाप) - एक पिता स्त्री एवं संतान की आवश्यकताओं को पूरा करता है। एक स्त्री को मां बनने का सौभाग्य पुरुष से ही प्राप्त होता है। संतान को उत्पन्न कराने में एक पुरुष का बहुत बड़ा योगदान होता है। अकेली मां ही इसमें शामिल नहीं है। पुरुष का योगदान ही स्त्री को मां कहने का दर्जा दिलाता है। पुरूष के बिना एक औरत कभी भी मां नहीं बन सकती, उसे मां बनने और खुद को साबित करने के लिए एक पुरूष की आवश्यकता पड़ती है। पूर्व में प्राकृतिक रूप से बच्चे  की उत्पत्ति शुक्राणु रूप में पुरूष के अन्दर ही होती। बाद में इसका स्थापन महिला के गर्भाशय में किया जाता है। इसीलिए यहां पिता का दर्जा माता से भी बड़ा हो जाता है।  संतान (औलाद) - संतान ही स्त्री-पुरु...