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आशिक का इंटरव्यू (not completed)

 ( प्रत्यक्ष साक्षात्कार)  प्रश्न : पहले तो आप पाठकों को अपना नाम बताइए उत्तर :   "जी मेरा नाम आशिक है" प्रश्न : महिलाओं के बारे में आपके क्या विचार हैं उत्तर :  मैं महिलाओं की इज्जत बहुत करता हूं प्रश्न : महिलाओं से आप किस तरह का संबंध रखते हैं उत्तर :  महिलाओं से मेरा एक ही संबंध है और वो है यौन-संबंध।  प्रश्न : क्या आप फ्लाइंग सिख को जानते हैं उत्तर :  जी नहीं,  फ्लाइंग किस तो जानता हूं प्रश्न : कल रोज़-डे है। कैसी लड़की को रोज़ देना पसंद करेंगे?  उत्तर :  उसे, जो मुझे रोज़ देगी Aap mujhe kya bolna chahte ho  O lv u Nanga parvat 123... Sex 7 Mujhe strike Sare part dekhne hai

मेरी इल्तिजा

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ये इल्तिजा है मेरी रहमत की निगा ह  रखने वाले से वो निगहबान तुम्हारा रहे सदा ना आए कोई ग़म का शूल आपकी राह में दामन महका रहे यूं ही खुशियों के फूलों से सदा बढ़ते रहो इस क़दर मुकाम पर अपने जैसे पूर्णिमा के चांद की चमक बिखर जाए आपके नाम की खुशबू जहां में महक उठे इस कदर तुम्हारी जिंदगानी का चमन कभी जो आए अंधेरा साया तुम्हारे जीवन में कदम ना डगमगाने पाए घबराकर हौसला जगाए रखना अंतरात्मा में छठ जाएगा यही बादल तुम्हें कामयाबी का मुंह दिखाकर जगाना ऐसी सर्द चांदनी जीवन में के लोग चकोर बनकर उसे छूना चाहे लेकिन तुम्हारे चांद से किरदार पे कभी गुमान का ग्रहण न लगने पाए

एक नज़र इधर भी देख लो

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  जुबां थमे, नज़र रुके, क़यामत बरपे तुम जो एक बार सलीके से दुपट्टा औढ़ लो उड़ रही है तुम्हारे बदन की खुशबू झुलस रही है नमी आवारा हवाओं से ताल्लुक़ रखना छोड़ दो अपने दुपट्टे को संभालो पैर पड़ जाए ना किसी का फ़ुज़ूल रिश्तों को बेकार में निभाना छोड़ दो फूलों से कहो कांटो से तुम्हें कोई ख़तरा नहीं शाख से लगे रहना है तो ताका-झांकी छोड़ दो मेरी शिकायतें नहीं तो ऐसा नहीं मैं परेशां नहीं मजबूरियों को मेरी आदत समझना छोड़ दो आजकल घबराया हुआ सा रहता हूं मैं बहुत हाथ सीने पे रख मेरी ज़िंदगी को नया मोड़ दो पाश-पाश हो गया है मेरा शीशा ए दिल जोड़ दो देख लो खुद को, आईना तोड़ दो

एक शख़्स

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मैं गुमनामियों के अंधेरे में खोया था अब तलक ताज़्जुब है इस भीड़ में कोई मुझे पहचानता है जो उम्रभर मेरा ना हो सका बदनसीबी देखो मेरा ग़ैर का होने का बुरा मानता है मिट चले मेरी नज़र से जिहालत के अंधेरे वो शख़्स पराया है जो ख़ुद को मेरा मानता है कोई ना पढ़ सका मेरे चेहरे की लिखावट के राज़  एक खुदा है जो मेरा हाल बखूबी जानता है वैसे तो मेरी तबीयत में कोई फ़र्क नहीं आता एक वो एक नज़र से मुझे लड़खड़ाने का हुनर जानता है।

किस्मत किसी शख़्स को आजमाती नहीं

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हर आदमी को वहशी दरिंदा ना समझो हर औरत भी औलाद को कोठे पे बैठाती नहीं दुनिया उजाड़ने में हवा का किरदार बड़ा होता है चिराग की लौ ही अकेले घर को जलाती नहीं इन दिनों मेरा ही काम सबसे मुश्किल लगा मुझे मैं बेरोज़गार हूं रोज़गार पे दुनिया बुलाती नहीं हर शख़्स इस दुनिया में किस्मत को आजमाता है कभी किस्मत किसी शख़्स को आजमाती नहीं यूं ही न जमाने ने उसे खुदा का खिताब दिया मां खून पिलाती है अपना भूखा सुलाती नहीं अपने गुनाहों की तौबा ख़ुदा से राब्ते में कर मैदान ए हश्र में फ़रियाद काम आती नहीं कितने ही सावन बीत गए प्यास अधूरी लगती है इश्क की आग है एक पल में तो बुझ पाती नहीं यूं तो सभी ग़ज़ल मैंने उसकी तारीफ़ में लिखी पर कोई भी मुकम्मल त'अर्रुफ़ कराती नहीं

दिल पे बोझ बना रहता है

लो खुद ही देख लो मेरे मिट्टी से रंगे हाथ मुफलिसी में कब हाथ साफ़ बना रहता है देखना ये है के तहज़ीब से उमर कौन बसर करें जवानी आने का जवानी जाने का दौर तो लगा रहता है सियासत में कौन हमेशा हुक़्मरां रहा यहां आना जाना फ़न्ने खां का लगा रहता है दौरे इश्क में गिरकर ही संभलना पड़ता है कौन इस मैदान में हर रोज़ खड़ा रहता है बेगुनाह परिंदों को यूं ही ना गिरफ़्तार करो क़ैद की एक रात का सदमा उमर भर लगा रहता है बेफ़िक्री से ना रिश्तों को लहूलुहान किया करो जख़्म ऊपर से भर भी जाए अंदर से हरा रहता है कोई कितना भी  उस क़ौम को छोटा समझे भूल करे जो फितरत से बड़ा हो बड़ा रहता है कभी जो फुर्सत मिले वालिद के दामन में बैठा कर वक्त गुजर जाए तो दिल पे बोझ बना रहता है

दौर ए बेरुख़ी

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मैं गुनाहगार नहीं और तुमको एतबार नहीं फिर सोचना कैसा तोहमत जो चाहे लगा दो मैं जानता हूं के इल्ज़ाम यूं ही सिर नहीं रखते कोई सुबूत नहीं मेरे ख़िलाफ़ तो झूठा ही बना दो ग़र बदनाम ही है करना मुझ अमन-परस्त को शराब हराम है तुम मुझे शराबी बता दो इश्क मेरा मज़हब इश्क ही मेरा इमां इश्क करना है जुर्म तो जो चाहे सज़ा दो तू है जुदा मुझसे मैं भी जुदा तुझसे बरसों से थे एक जां अब ऐसा ना सिला दो इंसान को इंसान की अब ज़ियादा जरूरत है तेरे मेरे बीच की इस दूरी को मिटा दो यूं तो लड़ाना आपस में सियासत का काम है मज़हब नहीं सिखाता यह सबको बता दो यही तो कमाल है हिंदुस्तां की मिट्टी का जो भी झुक के चूम ले उसे सीने से लगा लो