Best Sher ever from Diwan E Satyam




पूछता जो खुदा तेरी रजा क्या है
तो सबसे पहले तेरा नाम मैं लेता

कई बिगड़े मुक़द्दर मैंने संवरते देखें हैं
बाखुदा अपनी मोहब्बत का साथ पाकर

कितने नादान हैं वो हम पे मरते हैं
बेरुखी को भी मेरी सादगी समझते हैं

फुर्सत में तुम पे कोई नग़मा लिखेंगे
कई बार तहे दिल से सोचने के बाद

कई रात हमने आंखों में गुज़ार दी
के तेरा ख़्याल आए तो दूजा ना हो कोई

ख़्वाबों की दुनिया में तो जीना है मुमकिन
कोई बात ऐसी कर जो हक़ीक़त बयां करें

क्या दूं अब तुमको मिसाले-मोहब्बत
किसी का आंखों को जचना ही प्यार होता है

तेरे दीदार में कोई बात है शायद
लड़खड़ाता है जिस्म मेरा इज़ाज़त के बिना

कुछ इस कदर खोया हूं तेरी उल्फ़त में सितमगर
कोई कर रहा हो तहे-दिल से खुदा की इबादत जैसे

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