जिंदगी शायरी । Unki Shayari













हर किसी के रुतबे में थोड़ा फ़र्क होता है
कोई उन्नीस होता है, कोई बीस होता है

मैंने जलाया है यह चिराग तेरी सलामती के वास्ते
तू भी कोई काम ऐसा कर जिससे किसी को दुआ मिले

मेरी इन खुश्क आंखों ने एक सदी का दौर देखा है
कब्रिस्तान में लेटी लाशों का नज़ारा कुछ और देखा है

उम्र-तजुर्बा-बदन नाज़ुक-नाज़ुक तेरा
मत खेल पत्थर से चोट पहुंचेगी बहुत

तेरी उम्र क्या है, हस्ती क्या है? कुछ नहीं
दो पल की ज़िदगी है बस, ख़बर कुछ नहीं

अब होगी तेरी रुसवाइयां महफिले-आवाम 'सत्यं'
बेखुदी में बढ़कर उनका दामन जो थामा है

हमसे ना पूछो इस दौर में कैसी गुजर रही है?
जिंदगी बस यूं ही उतार-चढ़ाव में उलझ रही है

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